छत्तीसगढ़

नगर निगम भिलाई, रिसाली, भिलाई चरोदा और बिरगांव के महापौर के पद का आरक्षण पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर

संविधान के जानकार नगर निगम के मुद्दों में अपनी पैनी नजर रखने वाले आरटीआई कार्यकर्ता व कांग्रेस नेता अली हुसैन सिद्दीकी ने नगर निगम भिलाई, रिसाली, भिलाई चरोदा और बिरगांव के महापौर के पद का आरक्षण के खिलाफ 1 अप्रैल 2021को हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है जिस पर सुनवाई इसी सप्ताह होने की संभावना है सिद्दीकी का कहना है कि 18 सितंबर 2019 को छत्तीसगढ़ के 13 नगर निगम का आरक्षण किया गया था उस समय 2011 के जनगणना के हिसाब से अनुसूचित जाति का सर्वाधिक जनसंख्या प्रतिशत होने के कारण से अनुसूचित जाति के लिए भिलाई चरोदा और अनुसूचित जाति महिला के लिए रायगढ़ को आरक्षित किया गया था उसी तरह अनुसूचित जनजाति बाहुल्य अंबिकापुर को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित किया गया था और 25 प्रतिशत के हिसाब से अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए कोरबा और धमतरी तथा अन्य पिछड़ा वर्ग महिला के लिए राजनांदगांव को आरक्षित किया गया था महिला वर्ग के लिए जगदलपुर और चिरमिरी को आरक्षित किया गया था बचे हुए निगम भिलाई , दुर्ग, बिरगांव बिलासपुर और रायपुर को अनारक्षित (मुक्त) रखा गया था तब तक सब ठीक था!
लेकिन जैसे ही 28 दिसंबर 2019 को भिलाई नगर निगम से टूटकर 14 वे नगर निगम के रूप में रिसाली अस्तित्व में आया और सिर्फ रिसाली के महापौर पद का आरक्षण 16 मार्च 2021 को नियम कानून को ताक में रखकर अन्य पिछड़ा वर्ग महिला के रूप में आरक्षित किया गया जबकि रिसाली नगर निगम में अनुसूचित जाति की जनसंख्या का प्रतिशत 14 नगर निगमों में सर्वाधिक 17.47 प्रतिशत है और भिलाई चरोदा का अनुसूचित जाति की जनसंख्या का प्रतिशत 15.73 है इस हिसाब से रिसाली नगर निगम को अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित किया जाना था और भिलाई चरोदा को अनुसूचित जाति वर्ग से मुक्त कर नियमानुसार भिलाई और बिरगांव के साथ भिलाई चरोदा का भी आरक्षण चक्रानुक्रम (रोटेशन) या चिट (लॉटरी)निकालकर किसी एक को अन्य पिछड़ा वर्ग और दूसरे को महिला वर्ग तथा तीसरे को अनारक्षित वर्ग के लिए आरक्षण किया जाना था लेकिन बचे हुए ओबीसी वर्ग का आरक्षण और महिला वर्ग का आरक्षण रिसाली नगर निगम को ओबीसी महिला आरक्षित कर खानापूर्ति कर ली गई! लेकिन छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 11 (क) महापौर के पद का आरक्षण और छत्तीसगढ़ नगर पालिका (महापौर तथा अध्यक्ष के पद का आरक्षण) नियम 1999 के स्पष्टीकरण में यह बात बताया गया है कि जब किसी नए नगर निगम का गठन होता है तो उस निगम के महापौर पद का आरक्षण जिन निगमों में चुनाव संपन्न नहीं हुए हैं उन निगमों को शामिल करते हुए महापौर के पद का आरक्षण किया जाना है लेकिन ऐसा नहीं किया गया सिर्फ रिसाली नगर निगम के महापौर के पद का आरक्षण किया गया जो कि नियम विरुद्ध है!
भिलाई नगर निगम के महापौर के पद का आरक्षण किया गया था तब 2011 की जनगणना के अनुसार भिलाई नगर निगम की जनसंख्या 625700 थी और रिसाली नगर निगम के गठन के बाद भिलाई नगर निगम की जनसंख्या 516562 है इस हिसाब से भी भिलाई नगर निगम के महापौर के पद का आरक्षण दोबारा किया जाना था इस जनहित याचिका की सुनवाई इसी सप्ताह होने की संभावना है अगर याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला आता है तो इन चारों नगर निगमों का आरक्षण फिर से करवाना पड़ेगा!

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