छत्तीसगढ़

ग्राम पंचायत सचिव का धरना सतत जारी रहेगा।


दूर्ग ग्रामीण विधानसभा। सरकार की छल नीति का शिकार पंचायत सचिव आज करो या मरो की स्थिति में है । यही कारण है कि पंचायत सचिवों द्वारा नियमितीकरण की लंबित मांगों को पूरा नहीं करने के कारण आत्मदाह की चेतावनी देने बाध्य है । 26 वर्ष पूर्व ग्राम पंचायतों में गांव की समस्या को सरकार तक तथा सरकार की विभिन्न योजनाओं को गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुचांने हेतु पंचायत कर्मी योजना लागू किया गया था । ग्रामीण क्षेत्रो के बेरोजगार युवको को इसमें अपना भविष्य नज़र आया और सरकारी नौकरी समझ कर सेवा में जुड़ गया ।इन्हें क्या पता था कि यह योजना ग्रामीण बेरोजगारों को नौकरी देने के नाम पर प्रायोजित षडयंत्र है । उस समय पंचायत कर्मी 23 विभागो के 90 से अधिक प्रकार के कार्यों का संपादन करते थे बदले में 500 रुपये प्रति माह मेहताना के रूप में काम करते थे । यह राशि समकक्ष कर्मचारी के वेतन का 10 प्रतिशत था। समय समय पर पंचायत कर्मियों ने संघ के माध्यम से अपनी पीड़ा को सरकार के पास रखने का प्रयास भी करता रहा और शासन ने इनकी कुछ मांगो को निराकृत भी किया। किन्तु मुख्य मांग नियमितीकरण विगत 25 वर्षों से लंबित हैं ।आज पंचायत सचिव बदलते परिवेश के साथ 29 विभागो के 200 से अधिक कार्यो का संपादन करते हुए केन्द्र एवं राज्य सरकार के द्वारा वातानुकूलित चेम्बर में बैठकर बनाये गये विभिन्न योजनाओं को जमीनी स्तर पर मूर्त रूप देते हुए अंतिम व्यक्ति तक सफलता पूर्वक क्रियान्वित करते हैं ।वैश्विक महामारी कोरोना काल में अधिकांश विभागों के कर्मचारी जान है तो जहान है मान कर अपने घरों में बैठकर आराम किया वहीं पंचायत सचिवों ने अपनी प्राणों की परवाह ना करते हुये लोकहित में घर घर जाकर ग्रामीणों की हर समस्या को शासन को अवगत कराया । तथा जरूरत मंद परिवारों को चांवल दाल तेल साबुन जैसे अति आवश्यक सुविधा मुहैया कराया । कोरोना प्रभावित परिवारों के लिए होम आइसोलेशन एवं अप्रवासी मजदूरों के लिए कोरेनटीन सेंटर बनाकर यथोचित सेवाएं दिया । कोरोना काल मे फ्रन्ट लाइन वारियर्स के रूप में कार्य किया । इस सेवा के दौरान 35 पंचायत सचिव कोरोना प्रभावित होकर मृत्यू के मुँह में समा गए । इस के बदले में परिवार के आश्रित सदस्यों को कुछ भी लाभ नही मिला। इन मृत सचिवों के प्रति सरकार ने कोई संवेदना नही दिखाई । जबकि अन्य विभागो के कर्मचारियों को पचास लाख का बीमा सुविधा मुहैया कर आर्थिक लाभ दिया । इस प्रकार सरकार सचिवों के साथ सदैव सौतेला व्यवहार किया है। इतने लंबे अंतराल के बाद पंचायत सचिव सेवानिवृत्त के कगार में पहुँच गए हैं। कुछ सेवा निवृत भी हो चुके हैं। सेवानिवृत्त कर्मचारियों को जीवीकोतपार्जन के लिए सरकार की ओर से एक रुपये भी नही मिल रहा है ।अति अल्प मानदेय में कार्य करने के कारण ना तो परिवार का पालन पोषण कर पाया ना ही अपने बच्चों को उचित तालिम दे पाया । आज सेवानिवृत्त के पश्चात उनकी स्थिति बद से बत्तर है । किसी भी प्रकार के पेंशन के लिए अपात्र है एवं शारीरिक दुर्बलता के कारण मजदूरी के काबिल भी नही रहा । इस गंभीर स्थिति को भाँप कर पंचायत सचिव काफी चितिंत एवं परेशान हैं।पंचायत सचिवों ने पत्र व्यवहार, जनप्रतिनिधियों, धरना प्रदर्शन, रैली के माध्यम से सरकार को अवगत कराने का प्रयास किया । किन्तु राज्य सरकार अपनी सोंची समझी साजिश की तरह शोषण में लिप्त होकर कुम्भकर्णीय निद्रा में है ।सरकार अपनी झुठी आशवासनो के माध्यम से जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रही है । पंचायत सचिव लंबे समय से ठग का शिकार होने, पारिवारिक दायित्व में असफल हो जाने एवं सेवानिवृत्त के पश्चात अंधकार मय जीवन को देखते हुए आत्मदाह को अंतिम हथियार के रूप में देख रहे हैं

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