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दिल्ली में चल रहे देशव्यापी किसान आंदोलन में शामिल हुए छत्तीसगढ़ किसान सभा के कार्यकर्ता।

किसान विरोधी कानूनों की वापसी की मांग को लेकर दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानों के साथ छत्तीसगढ़ एवं कोरबा जिले के किसानों की एकजुटता व्यक्त करते हुए छत्तीसगढ़ किसान सभा का एक जत्था कोरबा जिला के किसान सभा अध्यक्ष जवाहर सिंह कंवर की अगुआई में कोरबा से दिल्ली पहुंच कर पलवल और सिंघु बॉर्डर में चल रहे देशव्यापी किसान आंदोलन में शामिल हुआ ।

छत्तीसगढ़ किसान सभा के सचिव प्रशांत झा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि यदि अगले कुछ दिनों में इन कानूनों को मोदी सरकार वापस लेने का फैसला नहीं करती, तो जिले से और अधिक संख्या में किसानों के जत्थे भेजे जाने की योजना बनाई गई है। कोरबा से शामिल हुए किसान सभा के कार्यकर्ता दिल्ली की सीमाओं पर अनिश्चितकाल के लिए धरने पर बैठे लाखों किसानों के विशाल समुद्र में बूंद के रुप में शामिल हुए।
दिल्ली के पलवल बॉर्डर में शामिल होकर उन्होंने आंदोलनकारी किसानों को छत्तीसगढ़ में किसान सभा, आदिवासी एकता महासभा और 21 किसान संगठनों के साझे मोर्चे छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन द्वारा इस कानून के खिलाफ प्रदेश और जिले के गांव-गांव में चलाए जा रहे अभियान-आंदोलन की जानकारी दी। कोरबा से गए किसान सभा के कार्यकर्ताओं ने देश और अन्य राज्यों में किसानों द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन के स्वरूपों और इसके अनुभवों की भी जानकारी ली। किसान सभा नेताओं ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी इस आंदोलन को और तेज करने के लिए इन प्रेरणादायक अनुभवों का लाभ लिया जाएगा।

कोरबा से गई टीम अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय महासचिव हन्नान मोल्ला और पंजाब किसान सभा के नेता मेजर सिंह पुन्नेवाल से भी मिली। ये दोनों सरकार के साथ किसानों की ओर से वार्ता करने वाली कमेटी के सदस्य हैं। किसान सभा के राष्ट्रीय नेताओं ने उन्हें देशव्यापी किसान आंदोलन की रूपरेखा से अवगत कराया। किसान सभा नेताओं ने बताया कि यह देशव्यापी आंदोलन किसान विरोधी काले कानूनों की वापसी के बाद ही समाप्त होगा और विश्वास जताया कि छत्तीसगढ़ के किसानों की भी इस आंदोलन में जबरदस्त भागीदारी होगी।

उन्होंने इस आंदोलन के खिलाफ प्रांत और धर्म के आधार पर सांप्रदायिक और राजनैतिक दुष्प्रचार करने की संघ-भाजपा की कोशिशों की कड़ी निंदा की है और कहा है कि इस देश के किसानों की न कोई जाति है, न धर्म। वे केवल मेहनतकश वर्ग के हैं और अपनी मेहनत का अधिकार सी-2 लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य के रूप में चाहते हैं। इसके लिए मोदी सरकार को कानून बनाना चाहिए, न कि मंडियों का निजीकरण करने, खाद्यान्न की असीमित जमाखोरी की छूट देने और ठेका खेती के जरिये गरीब किसानों को बर्बाद करने का कानून। इन किसान और कृषि विरोधी कानूनों का इस देश की मेहनतकश जनता डटकर मुकाबला करेगी और कॉर्पोरेटपरस्त सरकार को धूल चटायेगी।

दिल्ली के किसान आंदोलन में कोरबा जिले से किसान सभा नेता जवाहर सिंह कंवर, प्रशांत झा, नंदलाल कंवर, दीपक साहू, दिलहरण बिंझवार के साथ अनेकों कार्यकर्ता शामिल हुए। किसान नेता कंवर ने बताया कि यहां से मिले अनुभवों की रोशनी में कोरबा में किसान आंदोलन को और तेज करने की रणनीति बनाई जायेगी।

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