छत्तीसगढ़

हरे भरे पेड़ों को इमारती व जलाऊ उपयोग के लिए कर रहे दोहन

दुर्ग जिले के धमधा क्षेत्र में इन दिनों लॉक डाउन के मायने बदल गए हैं ग्रामीण इलाकों में लॉक डाउन को मजाक बनाकर आसपास सड़क किनारे या किसी घास जमीन पर स्थित पेड़ो को अंधाधुंध कटाई की जा रही है ग्रामीण इमारती व जलाऊ लकड़ी के उपयोग में लाने के लिए काटी जा रही है धमधा से बोरी तक के सफर में लगभग 200 से 300 पेड़ो काट चुके हैं वहीं धमधा से ग्राम बारहापुर होते हुए ठेलका चौक की ओर लगभग 200 से 300 तक के पेड़ों की कटाई की जा चुकी है जबकि सरकार द्वारा कोरोना वायरस के संकट काल में भी किसी भी प्रकार का राशन की कमी कमी नहीं है उचित मूल्य की दुकानों से निर्धारित समय पर पूरी की जा रही है गैस एजेंसी द्वारा उज्वाला योजना के तहत पर्याप्त मात्रा में गैस तुरंत रिफिलिंग कर दिया जाता है इस पर किसी भी प्रकार की अधिक राशि नहीं ली जा रही है इसके बावजूद सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं के तहत लगाए गए शासकीय पेड़ो सहित शासकीय भूमि पर अतिक्रमण करना नहीं छोड़ रहे हैं

पेड़ों की देखरेख करने वाले की निष्क्रियता से काटे जा रहे हैं पेड़

पूरे क्षेत्र में यह बहुत चर्चित मामला है धमधा शहर के बीच से आवागमन करते हुए अहिवारा से रायपुर की ओर आवागमन करते हुए लकड़ी की गाड़ियां चलती हैं जो कि अवैध परिवहन होती है इसके बावजूद भी उस पर पुलिस प्रशासन की कार्यवाही न वन विभाग के रेंजर एवं अन्य अधिकारियों का कोई भी दबाव होता है इससे लकड़ी माफिया आराम से दिनदहाड़े व रातो रात जब चाहे तब लगभग दिन में 50 गाड़ियों से अधिक अवैध लकड़ी का आवागमन करते हैं यही नहीं इन गाड़ियों का ना तो नंबर प्लेट होता है और ना ही गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन स्थिति साफ-सुथरी होती है यस संबंधित विभाग के कर्मचारियों के लिए दुधारू गाय साबित हो चुकी है अवैध लकड़ी परिवहन करती गाड़ियां शहर से नित्य शुल्क अदा कर बिना किसी रोक-टोक के निकल जाती है इस प्रकार पूरे क्षेत्र में लकड़ियों की अवैध कटाई एवं उसकी तस्करों की जा रहे हैं एक समय शासन ने हरिहर छत्तीसगढ़ जैसी अनेकों योजनाओं को एनजीओ, क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों, समाज सेवी संस्थाएं प्रतिवर्ष पौधारोपण करके पर्यावरण संरक्षण करने के लिए अपना बहुमूल्य सहयोग देते हैं लेकिन विडंबना है की बात है कि वन संरक्षण को लेकर विभागीय अधिकारियों चुप्पी साधे बैठे हैं यह रवैया पौधारोपण करने वाले उन सभी कार्यकर्ताओं के मनोबल को भी गिराता है शासन प्रशासन को चाहिए कि पूरे धमधा ब्लाक के सभी शासकीय पेड़ों का संरक्षण कर उनमें रेडियम लगाया जाए उनकी गिनती कर नए पौधों से लेकर उसकी बढ़ने तक की कार्य योजना बनाई जाए साथ ही पेड़ काटने वालों की सतत निगरानी कर उन कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जाये जिससे जनता के अच्छे संदेश पहुंचेगा

विभाग के पास पेड़ बचाने एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए कि नहीं है कोई योजना

इस मामले में संबंधित वन विभाग के अधिकारी और रेंजर एवं अन्य छोटे से लेकर बड़े अधिकारी कुंभकरण नींद में सोए हुए हैं किसी को जानकारी नहीं है कि क्षेत्र में कितने शासकिय पेड़ है या लगाए गए हैं इनमें कितने बच्चे हैं या किसी पेड़ को बचाने में क्या मुहिम क्या योजना बनाई जा सकती है पेड़ों के संरक्षण के लिए विभागीय अधिकारियों के पास कोई भी कार्य योजना नहीं है साथ ही वे इस क्षेत्र में सदन दौरा भी नहीं कर रहे हैं जिसका लाभ लकड़ी माफिया सहित ग्रामीण उठा रहे हैं विभागीय निष्क्रियता की वजह से पेड़ो काटने वाले के हौसले और भी बुलंद होते जा रहे हैं अगर कोई व्यक्ति इस मामले की शिकायत करनी भी हो तो उसे पता भी नहीं कि धमधा ब्लाक में संबंधित विभाग के अधिकारी कौन हैं और वह कहां रहते हैं क्योंकि उनसे जनता का कोई संपर्क नहीं है

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