छत्तीसगढ़

पूरे विश्व में कोरोना महामारी में एक दूसरे को मदद कर रहे हैं सरकार किसी को नौकरी से नहीं निकालने की आदेश कर रहे हैं वही भिलाई इस्पात संयंत्र के सेक्टर 9 हॉस्पिटल में ठेकेदारों द्वारा मजदूरों को काम से निकाला जा रहा है

भिलाई इस्पात श्रमिको ने की छटनी से रोक लगाने कि अपील। देशबन्दी व संक्रमण काल में भिलाई इस्पात संयत्र के श्रमिको ने छटनी पर रोक लगाने के बावत अपिल सरकार से की। उन्होने अपनी अपील में कहा कि देशबन्दी के दौरान जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय व अनुसंधान केन्द्र सेक्टर – 9 भिलाई के 90 श्रमिको विगत् 1 मई अर्थात मजदूर दिवस से ही काम से बैठा दिया गया है। यह तमाम श्रमिको को जिन्होंने 30 अप्रैल तक सेक्टर – 9 चिकित्सालय में अटेन्डेट व लाँन्ड्री विभाग संक्रमणकाल मे अपनी आवश्यक सेवाये दी है आज उन्हें ठेका न होने के कारण काम से बैठना पड़ रहा है। प्रबंधन ने न तो अब तक नया टेन्डर ही दिया है और ना ही पूराने टेन्डर की मीयाद (अवधि) ही बढाई है। जिसके कारण आज 90 श्रमिको के परिवारो की रोजी रोटी की अनिश्चयता बनी हुई है। भिलाई प्रशिक्षु व कल्याण समिति द्वारा 300 श्रमिकों का अंतिम भुगतान नहीं करने व महिला श्रमिको के साथ अभद्रता कि शिकायत श्रमिको द्वारा पूर्व मे करने के बावजूद प्रबंधन द्वारा सारे नियम कायदे को ताख पर रखकर भिलाई प्रशिक्षु को ठेका दिया गया है। भलाई इस्पात संयत्र में हजारों श्रमिक कार्यारत है, किन्तु यहाँ श्रम कानूनो का उल्लंघन कर ठेकेदारों द्वारा श्रमिको का शोषण किया जाता है। ठेकेदारों द्वारा न्यूनतम तय मजदूरी का भुगतान नहीं किया जाता है न ही तय सीमा पर वेतन भुगतान किया जाता है। देशबंदी के दौरान भी बहुत से विभागो में 2 माह से वेतन भुगतान नहीं किया गया है। जिसकी शिकायत पूर्व मे श्रमिक यूनियन के द्वारा प्रबंधन को कि जा चुकी है। हालात यह है कि भिलाई इस्पात संयत्र से भी कई विभागो में श्रमिको की छटनी की जा रही हैं। अतः ऐसे विषम परिस्थितियों मे कार्यरत श्रमिकों व उद्योग को बचाये रखने वाले मेहनतकशो की बेवजह छटनी पर रोक लगाई जाए। साथ ही साथ सेक्टर – 9 के चिकित्सालय में कार्यरत 90 श्रमिक ( अटेन्डेट व लाँन्ड्री) को निकाला न जाये। इन श्रमिको का बस एकमात्र सरकार से यह निवेदन है की इन महनत कशो को उचित न्याय मिल पाये व किसी मजदूर का रोजगार न छीना जाये। अब देखना यह की इन सभी समाजसेवक जो इन इन गंभीर परिस्थितियों में भी समाज सेवक अपनी सेवाएं देते रहे तो क्या इन को न्याय मिल पाएगी ऐसी स्थिति में l

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