छत्तीसगढ़

कोविड-19 के कारण विश्व के हजारों कंपनी भारत में उद्योग लगाने की अग्रसर जिला दुर्ग में नंदिनी नगर सर्व सुविधा युक्त :रविशंकर सिंह

नंदनी चूना पत्थर खदान क्षेत्र

आज से लगभग 50 वर्ष पूर्व भिलाई इस्पात संयंत्र भिलाई को इस्पात निर्माण में चुना पत्थर की आपूर्ति हेतु नंदनी माइंस एवं क्रशिंग प्लांट का निर्माण हुआ जिसमें 5000 अधिकारी कर्मचारी एवं मजदूर के आने से नंदिनी नगर असितत्व में आया जिससे नगर में सर्व सुविधा युक्त शिक्षा, चिकित्सा, बाजार ,रोजगार, व्यवसाय, मनोरंजन के साथ-साथ धार्मिक ,सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थाएं विकसित हुई नंदिनी नगर के साथ-साथ आसपास के 20 ग्रामों को भिलाई इस्पात संयंत्र के समुदाय के विकास विभाग के द्वारा जन सुधारों का लगभग मिला धीरे-धीरे अधिकारी एवं कर्मचारी मजदूरों की संख्या गिरती गई वर्तमान संख्या 340 के आसपास रह गई है जिसे नगर की स्थिति में गिरावट आई है कमी आने की वजह से पलायन होना सुरु हुआ है इस सभी स्थितियों को देखते हुए हम लोग2006से नंदनी में नए संयंत्र औद्योगिक विकास की मांग करते हुए प्रयास कर रहे हैं परिणाम स्वरूप नंदनी में सेल एवं मॉइल (MOIL)संयुक्त उपक्रम लगाने हेतु सेल मॉइल फेरो एलायज प्राइवेट लिमिटेड (SMFAPL) कंपनी निगमित हुई नंदिनी में स्थल का चयन हुआ निर्माण हेतु निविदा जारी हुआ पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी हेतु जनसुनवाई हुई 23 मार्च 2011 को पर्यावरण मंत्रालय कि मंजूरी मिली उम्मीद थी जल्द निर्माण होगा फेरो एलायज सयंत्र लगेगा पूर्व मे बीएसपी नंदनी द्वारा खड़ी की गई अधोसंरचना का पुनः निर्माण होगा और वीरान हो रहा नंदिनी नगर फिर से आबाद होगा परंतु सेल और स्टील इंडस्ट्रीज के उत्पन्न आर्थिक संकट की वजह से फेरो अलॉय सयंत एवं नान रिकवर कोक ओपन बैटरी संयंत्र का निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हुआ एवं 24 सितंबर 2013 को सेल मॉइल के साथ आरआईएनएल विशाखापट्टनम को शामिल कर 600 करोड़ की लागत से नंदनी में फेरोएलॉय संयंत्र लगाने का निर्णय हुआ साथ ही 550 करोड़ की लागत से नंदनी में नन रिकवर कोक ओपन बैटरी संयंत्र लगाने का निर्णय हुआ जिसकी निविदा भी जारी हुआ परंतु अभी तक दोनों संयंत्रों का निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है कोक ओपन संयंत्र के बनने से महत्वपूर्ण विदेशी मुद्रा में बचत होगी सेल के खनिज अयस्क की लागत में लगभग 50% विदेशी कोल खनिज का इस्तेमाल किया जाता है नंदनी मे सयंत्र लगाने से इसमें कमी आती और सेल को मुनाफा होता है

कुछ दिन पूर्व सरकार ने भारत सरकार की नीति आयोग दिल्ली के द्वारा देश के सभी सार्वजनिक उपक्रमों के रिक्त भूमि के संबंध में जानकारी मांगी गई थी भिलाई इस्पात संयंत्र के नंदिनी में अपने माइंस नंदनी के 3500 एकड़ रिक्त भूमि भूखंड की जानकारी नीति आयोग को प्रस्तुत की है नीति आयोग के द्वारा भूखंड की जानकारी मांगने का स्पष्ट आशय यह है कि रिक्त भूमि पर बड़े उद्योग लगाने का संभावना दिख रहा

नंदिनी नगर आसपास के क्षेत्र

संयंत्रों के मुख्य बड़े शहरों में लगने से प्रदूषण और जनसंख्या का दबाव बढ़ सकता है जिसे कि पर्यावरण संतुलन एवं साथ संबंधित परेशानियां बढ़ती है जिससे पर्यावरण संतुलन एवं स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ती है उद्योग का क्लस्टर बने और ग्रामीण क्षेत्रों में भी उद्योग लगे तो इस समस्या का निराकरण हो सकेगा इसी तरह की औद्योगिक कलस्टर बनाने के सारे संसाधन की उपलब्धता नंदिनी नगर क्षेत्र में है नंदिनी माईनस से भिलाई 18 किलोमीटर कि दूरी पर 35 किलोमीटर रायपुर राजधानी में 30 किलोमीटर दुर्ग यहां से विमानतल 50 किलोमीटर है भिलाई से एवं है 5 शिवनाथ नदी किलोमीटर 25 किलोमीटर पर एम्स अस्पताल है यह क्षेत्र पूर्णता मैदान एवं नक्सल समस्या से मुक्त है यहां खनिज आधारित बड़े एवं छोटे कृषि आधारित संयंत्र संचालित है 3500 एकड़ का औधोगिक भूखंड दुर्ग जिले मे औऱ कही नहीं हैं वर्तमान समय में कोरोना संकट कि वजह से उधोग जगत मे भारी गिरावट आई है दुनिया की 1000 कंपनियां जिसमें मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल डिवाइस टेक्सटाइल और सिंथेटिक फैब्रिक्स के क्षेत्र में भारत में निवेश कर संयंत्र लगाना चाहते हैं जिसे अपना देश प्रोडक्शन हब बनने के दिशा में आगे बढ़ेगा पिछले वर्ष केंद्र सरकार ने टैक्स को घटाकर 25.17 फीसदी कर दिया था वही नई फैक्ट्री में आग लगाने वालों के लिए यह टेक्स घटकर 17 फीसदी पर ला दिया गया है दक्षिण पूर्व एशिया मे सबसे कम है सरकार ने मिनिमम अल्रतटनेस टैक्स ( MAT)में राहत दी है कंपनियों को अब 18.5 फीसदी कि बजाय 15 फीसदी कि दर से मैट देना होता हैं जो कि नए बडे उधोग के लिए राहत देने वाला है अगर इस प्रयास पर सफल रूप में औद्योगिक हब नंदिनी बनता है तो नगर एवं क्षेत्र की आर्थिक एवं सामाजिक उन्नति होगी एवं बेरोजगारी दूर होगी एवं इस देश की आर्थिक प्रगति पर नंदनी की एक नाम होगी एवं साथ ही पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष रवि शंकर सिंह की प्रयास सफल होगा जिन्होंने 1984 से अभी तक उजड़ते नंदनी को बसाने के लिए नंदिनी में रहकर जीवन पर्यतन पर्यास करते रहे हैं

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