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अधिवक्ताओं को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के दायरे में लाया गया तो आंदोलन की चेतावनी ,BCI

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बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के दायरे में अधिवक्ताओं को लाने के सरकार के कदम पर कड़ा असंतोष व्यक्त किया है। बीसीआई ने चेतावनी दी है कि यदि इस तरह का कानून पारित हुआ तो कानूनी बिरादरी द्वारा “बड़े पैमाने पर आंदोलन” किया जाएगा। बीसीआई ने कानूनी बिरादरी की ओर से असंतोष व्यक्त करते हुए, 11 मार्च, 2020 को एक पत्र में उपभोक्ता मामलों के मंत्री राम विलास पासवान को “गहरी पीड़ा” और “आक्रोश” व्यक्त किया, जिसमें कहा गया कि यदि विवादास्पद प्रस्ताव वापस नहीं लिया जाता है तो अधिवक्ताओं को सड़क पर आने और विरोध करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। बार काउंसिल ऑफ दिल्ली द्वारा 9 मार्च को उपभोक्ता मामलों के मंत्री को एक पत्र लिखा था। केंद्रीय उपभोक्ता मंत्री रामविलास पासवान को संबोधित पत्र में दिल्ली बार काउंसिल ने कहा था कि वकील न्याय वितरण प्रणाली का अभिन्न अंग हैं और इन्हें “सेवा” की परिभाषा में शामिल नहीं किया जा सकता। कानूनी पेशा “व्यापार या व्यावसायिक गतिविधि” नहीं है। BCI ने अन्य बातों के साथ इस बात पर जोर दिया है कि इस तरह के समावेशन से कानूनी पेशे पर गंभीर चोट होगी। बीसीआई ने कहा कि यह बहुत ही अपमानजनक है और देश भर के वकील उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की परिभाषा के तहत उनके समावेश को कभी स्वीकार नहीं करेंगे। इसमें यह भी कहा गया है कि अधिवक्ता अधिनियम, 1961 पहले से ही अधिवक्ताओं द्वारा दुराचार के खिलाफ पर्याप्त रूप से सुरक्षा कवच है और दुराचार की शिकायतों से निपटने के लिए एक तंत्र प्रदान करता है। बीसीआई ने चेतावनी दी है कि इस तरह का कानून पारित हुआ तो कानूनी बिरादरी द्वारा “बड़े पैमाने पर आंदोलन” किया जाएगा। 12 मार्च को दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत अधिवक्ताओं को ‘सेवा प्रदाताओं’ के दायरे में शामिल करने के प्रस्ताव के विरोध में “व्हाइट आर्म बैंड्स” पहनकर प्रदर्शन किया था।

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