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जिले में अधिकतम मेडिकल दुकानों में बिक रही प्रतिबंधित दवाइयां ड्रग्स कंट्रोलर विभाग चुप

दुर्ग-शहर में नशीली दवाईयों का कारोबार बड़े पैमाने में फल-फूल रहा है.नशे की दवाईयां कुछ मेडिकल स्टोरों में आसानी से मिल रही है. जिससे युवा तेजी से उसकी लत का शिकार हो रहा है. लेकिन विभाग को जानकारी होने के बाद भी कार्रवाई करने से परहेज कर रहे है.

जिससे अधिकतर युवा इस सस्ते नशे की चक्कर में अपनी जिंदगी बर्बाद कर रहे है.शहर के रहने वाले कुछ युवको ने बताया कि शहर के कुछ स्थानों में प्रतिबंधित और गैर प्रतिबंधित नशीली दवाईयां मेडिकल स्टोर, किराने की दुकानों और पान ठेलो आदि की दुकानों में बड़ी आसानी से मिल रहीं. शहर में थोक के भाव में खुली दवा दुकानों में जहर बेचा जा रहा है.कुछ दवा दुकानदार बगैर डॉक्टर की पर्ची के ही कई प्रतिबंधित दवाएं लोगों को मुनाफा कमाने के चक्कर में दे रहे हैं.

शहर के सभी इलाकों में नशीली दवाओं का अवैध कारोबार चल रहा है.दिन हो या रात, खरीदने वाले खुलेआम इन दुकानों पर पहुंचते हैं और मनमाफिक नशे की दवा खरीदते हैं. वहीं ड्रग्स कंट्रोल विभाग कभी कभार ही इस ओर ध्यान नहीं देते है. शहर के कुछ मेडिकल में नाइट्रोटेन सहित कोरेक्स व अन्य प्रतिबंधित दवाएं, जिन्हें डाक्टर की पर्ची के बिना देना अपराध की श्रेणी में आता है जिसकी खुलेआम बिक्री हो रही हैं.

नशेड़ी इन्हें 50 फीसदी से अधिक दाम में भी खरीद लेते हैं. इसके कारण दुकान संचालकों के लिए यह कमाई का बड़ा जरिया बन गया है. गौरतलब है कि नशे की लत का शिकार युवक किसी भी बड़े अपराध को अंजाम देने से नहीं चूकते है. जनकार बताते हैं कि इन दवाइयों का नशा करने के बाद लोग किसी को भी मारने और मरने पर उतारू हो जाते हैं.
वही ज्यादातर नशा करने के लिए लोगों की सबसे पहली पसंद खांसी की सीरप है. कोरीन, कोरेक्स, टोरेक्स सहित कप सीरप लोगों को आसानी से कहीं भी मिल रहा है और यहां जहां आम तौर पर 40 से 70 रुपए में एक सीरप मिलता है और इसके लिए डॉक्टर का पर्चा आवश्यक होता है लेकिन नशेड़ियों द्वारा उसे दो तीन गुना दाम में खरीदा जा रहा है.

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