छत्तीसगढ़

नकली पुलिस बनकर रकम वसूली

बिलासपुर. कारोबारियों को हनीट्रैफ में फंसाकर वसूली का प्रकरण शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। ठगों ने खुद को सिविल लाइंस थाने का स्टाफ और डीएसपी बताकर कारोबारियों से दो लाख रुपयों की मांग की। अब तक 30 हजार रुपए वसूल भी चुके हैं। कारोबारियों को डर है कि इस रैकेट में असल पुलिस के अधिकारी शामिल हो सकते हैं, जो उन्हें बुरी तरह न फंसा दें। इस पूरे मामले की जानकारी एसपी प्रशांत अग्रवाल को भी हैं, उन्होंने कहा- कि पीड़ित थाने में आकर शिकायत करें, पुलिस दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी।

यह है पूरा मामला
करीब चार दिन पहले सिविल लाइन क्षेत्र के दो व्यापारियों का संपर्क शहर में देहव्यापार से जुड़े एक दलाल से हुआ। दलाल ने सौदा कर उनसे दो युवतियों का फोन नंबर साझा किया। इसके बाद कारोबारियों को युवतियां एक महिला के मकान में लेकर गईं। चारों अलग अलग कमरे में मौजूद थे। इस बीच जिस महिला ने उन्हें कमरा उपलब्ध कराया था उसने अचानक पुलिस-पुलिस का शोर मचाना शुरू कर दिया। दोनों कारोबारी डर गए। इस बीच दो खाखी पैंट पहने दो युवक भीतर आए और कारोबारियों को थाने ले जाने की बात कहने लगे। आरोपी मकान से बाहर लाकर कारोबारी से बात पैसे देकर सौदेबाजी करने की बात कहने लगे।

कारोबारियों से उन्होंने फोन पर किसी से बात करवाई। फोन की दूसरी तरफ मौजूद शख्स ने खुद को डीएसपी देखमुख बताया। इस बात चीत की रिकॉर्डिंग भी कारोबारियों ने रखी है। डीएसपी ने दो लाख रुपए की मांग की। जैसे-तैसे व्यापारियों ने 30 हजार रुपए दिए। बाद में उन्होंने डीएसपी देशमुख के बारे में जानकारी जुटाई।कारोबारियों को पता चला कि देशमुख नाम का कोई अधिकारी पुलिस महकमे में नहीं है। इस पर व्यापारियों को संदेह हो गया कि इसमें पूरा एक गिरोह काम कर रहा है। उन्होंने कथित डीएसपी से अपने आफिस का पता बताने के लिए कहा। कहा वे वहीं आकर पैसा देंगे। डीएसपी ने मना किया कहा- आफिस में पैसा नहीं लेते। इसके बाद से उसका मोबाइल बंद है।

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